टैक्स की तारीख आते ही 'कहीं अधिक टैक्स तो नहीं लग रहा' जैसी चिंता आती है। आयकर राहत का मतलब सिर्फ टैक्स कम करना नहीं, बल्कि सही तरीके से छूट और कटौती लागू करके बेवजह भुगतान से बचना है। नीचे सरल भाषा में बताऊँगा कि कौन-सी राहत आपके लिए उपयोगी हो सकती है और उन्हें कैसे क्लेम करें।
सबसे पहले जान लें कि राहत के दो बड़े हिस्से होते हैं: एक तो सीधे कर में कटौती देने वाली धारणाएँ (जैसे निवेश और बीमा) और दूसरी भुगतान या वेतन से जुड़ी विशेष राहतें (जैसे वेतन में होने वाले एरियर्स पर सेक्शन 89 जैसी राहत)। आम तौर पर लोग 80C जैसी कटौतियाँ, स्वास्थ्य बीमा के लिए 80D, होम लोन के ब्याज पर धारा 24 और दान पर 80G जैसी सुविधाएँ लेते हैं।
दूसरी ओर, कुछ मामलों में टैक्स रिबेट भी मिलती है जो आपकी कुल कर देनदारी घटा देती है। इसके अलावा TDS में ज्यादा कटौती हुई हो तो रिफंड के रूप में पैसा वापस मिल सकता है। खासकर वरिष्ठ नागरिकों, नौकरी छोड़ने वालों या वेतन में बकाया मिलने पर मिलने वाली राहतें ध्यान से देखनी चाहिए।
1) अपनी आय और दस्तावेज़ सहेजें: सैलरी स्लिप, बैंक इंटरेस्ट सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस प्रीमियम रसीद, होम लोन सर्टिफिकेट, दान रसीद आदि रखें। सही दस्तावेज होने से दावा आसान होता है।
2) योग्य छूटें पहचानें: अपने खर्च और निवेश देख कर तय करें कि आप 80C, 80D, 24(b), 80G आदि में क्या-क्या क्लेम कर सकते हैं। यदि वेतन में एरियर्स हैं तो सेक्शन 89 के तहत राहत के लिए Form 10E भरना पड़ सकता है।
3) ITR भरते समय सही कॉलम भरें: आयकर रिटर्न में हर कटौती और रिबेट के लिए अलग जगह होती है। गलत वर्गीकरण से दावा रिजेक्ट हो सकता है या नोटिस मिल सकता है।
4) TDS चेक करें और रिकॉर्ड रखें: साल भर में आपने या आपके नियोक्ता ने कितना TDS काटा, यह देखें। अधिक कटौती हुई तो ITR में क्लेम कर रिफंड लें।
5) ई-फाइलिंग और रिव्यू: ITR दायर करने से पहले गणनाएँ दोबारा जाँचें। अगर गलती हो गई तो रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं (कानूनी सीमा के भीतर)।
छोटी सलाह: अगर आपकी आय जटिल है (कई स्रोत, बकाया वेतन, पूंजीगत लाभ) तो टैक्स कंसल्टेंट से मिलें। वह सेक्शन-वार राहत और फार्म 10E जैसे विशेष फॉर्म सही तरीके से भरवा देगा। और हाँ, सरकारी पोर्टल और नोटिफिकेशन समय-समय पर बदलते रहते हैं — इसलिए नवीनतम नियम आयकर वेबसाइट पर चेक करें।
आखिर में, आयकर राहत का मकसद आपकी नियमानुसार बचत बढ़ाना है। सही दस्तावेज़, नियमों की जानकारी और सूझबूझ से आप टैक्स में वैध कमी ला सकते हैं और अनावश्यक जुर्माने से बच सकते हैं।
भारत का मिडिल क्लास वर्ग यूनियन बजट 2025 का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जिसमें उन्हें महत्वपूर्ण आयकर राहत की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से उम्मीद है कि वे इस वर्ग के सामने आने वाली बढ़ती वित्तीय दबावों को ध्यान में रखते हुए उपाय करेंगे। उम्मीदें इसमें शामिल हैं: मौलिक छूट सीमा को 5 लाख रुपए तक बढ़ाना, कर स्लैब में सुधार करना, और होम लोन, बचत एवं चिकित्सा खर्च के लिए कटौती में वृद्धि।