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बकरीद — कुर्बानी, नमाज़ और व्यवहारिक तैयारी

बकरीद पर लोगों के मन में कई छोटे-छोटे सवाल होते हैं: कब नमाज़ होती है, जानवर कैसे चुनें, और मांस कैसे बाँटें? अगर आप पहली बार तैयारी कर रहे हैं या हर साल बेहतर तरीके से मनाना चाहते हैं, तो यहां सीधे और काम के सुझाव दिए हैं जो तुरंत लागू किए जा सकते हैं।

नमाज़ और समय — क्या ध्यान रखें

ईद की नमाज़ आमतौर पर सुबह सूर्योदय के बाद अदा की जाती है। मंदिर या स्थानीय मस्जिद का वक्त ज़रूर देख लें क्योंकि शहरों में समय और स्थान बदल सकते हैं। नमाज़ से पहले तहरीम (takbir) पढ़ने का रिवाज़ होता है और अक्सर इमाम एक छोटा संदेश भी देते हैं — उस संदेश को सुन कर घर लौटें। भीड़ से बचने के लिए पहले से अपने परिवार के साथ मिलकर पहुँचने का प्लान बनाएं और जरूरी सैनेटाइज़ेशन किट साथ रखें।

नमाज़ के बाद लोगों से मिलना, गले मिलना और मुबारकबाद लेना आम है — पर भीड़-भाड़ में सावधानी रखें, छोटे बच्चों को साथ कसकर रखें और वाहन पार्किंग का पहले से इंतज़ाम कर लें।

कुर्बानी — जानवर चुनना, विधि और वितरण

कुर्बानी के लिए जानवर चुनते समय स्वास्थ्य और उम्र पर ध्यान दें। जो जानवर स्वस्थ, साफ-सुथरा और सरकारी नियमों के अनुसार बिल्ट/वेटिंग पास हो उसे ही चुने। अगर आप मार्केट से ले रहे हैं तो विक्रेता से पूछें कि क्या पशु का टीकाकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड मौजूद है।

कुर्बानी के बाद मांस को तीन हिस्सों में बाँटना प्रचलित है: एक हिस्सा घर के लिए, एक हिस्सा रिश्तेदारों/दोस्तों के लिए और एक हिस्सा जरूरतमंदों को। अगर आप व्यक्तिगत तौर पर जरूरतमंदों तक नहीं पहुँचा सकते, तो स्थानीय मस्जिद, मदरसा या भरोसेमंद एनजीओ को दें। इससे मांस सही हाथों तक जल्दी पहुँच जाता है।

कुर्बानी करते समय साफ़-सफाई और सुरक्षा जरूरी है। तेज़ चाकुओं और भारी उपकरणों को बच्चों और बुज़ुर्गों से दूर रखें, और जहां कटिंग हो वहाँ पर मजबूत सतह व रबड़ मैट लगाएं ताकि फिसलन न हो। मांस को तुरंत ठंडा करके पैक करें — छोटे हिस्सों में बाँटकर फ्रीज़ करना बेहतर रहता है।

यदि आप जीवित कुर्बानी करने से असहज हैं या नियमों से जुड़ी दिक्कतें हैं, तो आप ऑनलाइन क्यूर्बानी सर्विसेज़ या स्थानीय सामूहिक कुर्बानियों का विकल्प चुन सकते हैं — ये सेवाएँ अक्सर नाइज़र, कटिंग और पैकिंग का पूरा काम करती हैं और मांस सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचाती हैं।

खर्च का बजट बनाते समय जानवर, कटाई की फीस और पैकिंग/डिलीवरी का अनुमान पहले से रखें। बड़े त्योहार पर कीमतें ऊपर होती हैं, इसलिए जल्दी खरीदारी करने से खर्च कम होता है और विकल्प भी अच्छे मिलते हैं।

अंत में, बकरीद पर त्याग और मदद का भाव सबसे बड़ा हिस्सा है। अगर आप कुर्बानी नहीं कर पा रहे, तो राशन, कपड़े या आर्थिक मदद किसी स्थानीय राहत संस्था को दें — ईद की सच्ची खुशी बांटने में है।

अगर आप अपने शहर के नियम, नमाज़ का सटीक समय या सामुदायिक कुर्बानी के ऑप्शन जानना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी इमाम या नगर निगम की वेबसाइट पर देख लें। इससे त्योहार शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से मनाना आसान हो जाता है।

ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, इस्लामी कैलेंडर का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। 2024 में यह रविवार, 16 जून को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर और अन्य पश्चिमी देशों में मनाया जाएगा, जबकि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में यह एक दिन बाद, 17 जून को मनाया जाएगा। इस त्योहार को पैगंबर इब्राहिम की परंपरा से जोड़ा जाता है और इसमें कुर्बानी दी जाती है।