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जेफ्री हिन्टन: डीप लर्निंग के जनक और उनकी एआई चेतावनियाँ

क्या वही व्यक्ति जो आधुनिक AI की नींव रखता है, अब दुनिया को इसके खतरे के बारे में चेतावनी दे रहा है? हाँ—जेफ्री हिन्टन ने दशकों में जो काम किया, वही आज की बड़ी AI क्रांति का आधार है। अगर आप समझना चाहते हैं कि डीप लर्निंग कैसे बनी और क्यों विशेषज्ञ इसे लेकर चिंतित हैं, तो ये पेज आपकी शुरुआत के लिए है।

मुख्य योगदान

जेफ्री हिन्टन ने न्यूरल नेटवर्क्स और बैकप्रोपेगेशन जैसी तकनीकों को व्यवहारिक बनाया। 2012 में उनके मार्गदर्शन में प्रकाशित AlexNet मॉडल ने इमेज रिकग्निशन में बड़ा बदलाव लाया और डीप लर्निंग को मुख्यधारा में ला दिया। उन्होंने Boltzmann machines और deep belief networks जैसे विचार भी आगे बढ़ाए। इसके कारण आज की भाषा और इमेज मॉडल्स संभव हुए हैं।

उनकी उपलब्धियों में Turing Award (2018) भी शामिल है, जो उन्हें और दो अन्य विशेषज्ञों—यन्न लेकुन और योगेश बेंगियो के साथ मिला था। यह पुरस्कार कंप्यूटर विज्ञान में दीर्घकालिक प्रभाव के लिए मिलता है।

एचिंटन की चेतावनियाँ — क्या चिंता करने की वजह है?

हाल के वर्षों में हिन्टन ने खुलकर कहा कि बड़े AI मॉडल खतरनाक हो सकते हैं। वे कहते हैं कि जब मशीनें बहुत सक्षम हो जाएँगी, तो उनकी भेजी-लेखी जानकारी, ऑटोमेशन और सुदृढ़ निर्णय मानव नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने बड़े मॉडल के विकास पर निगरानी, पारदर्शिता और नियमों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

क्या यह अतिशयोक्ति है? नहीं हमेशा। उनका तर्क तकनीकी नहीं तो व्यावहारिक है: जब कोई सिस्टम गलत सूचना दे, निजता छेड़े, नौकरी छीन दे या हथियारों में इस्तेमाल हो—इन सबका असर समाज पर पड़ता है। इसलिए वे सिर्फ चेतावनी नहीं देते, बल्कि सार्वजनिक चर्चा और नीति बनाने की अपील करते हैं।

आप क्या कर सकते हैं? सरल जवाब—जानकारी बढ़ाएँ और सवाल पूछें। जब कोई नया ऐप या AI टूल आपके काम या निजी जीवन को प्रभावित करे, तो डेटा सुरक्षा, निर्णय का हिसाब और किसका जवाबदेह होगा—ये सवाल उठाएँ। नीति निर्माताओं से मांग करें कि वे पारदर्शिता और टेस्टिंग पर नियम बनाएँ।

अगर आप टेक में हैं तो मॉडल की सीमाएँ समझें: हर मॉडल सटीक नहीं होता, और गलतियाँ महंगी पड़ सकती हैं। इसलिए डिजाइन में इंसानी ऑडिट, परीक्षण और सुरक्षा तंत्र रखना जरूरी है।

हम इस टैग के जरिये जेफ्री हिन्टन से जुड़ी नई खबरें, उनके इंटरव्यू और AI नीति पर होने वाली चर्चाओं को साझा करेंगे। अगर आप AI के लाभ और जोखिम दोनों समझना चाहते हैं, तो इस टैग को फॉलो रखें—यहाँ साफ, सीधे और प्रैक्टिकल जानकारी मिलती रहेगी।

जेफ्री हिन्टन, जो एक प्रसिद्ध कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं, को मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क्स पर उनके बुनियादी काम के लिए भौतिकी में 2024 का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। हिन्टन ने यह पुरस्कार जॉन हॉपफील्ड के साथ साझा किया है। उनके काम ने आधुनिक मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग प्रौद्योगिकी की नींव रखी है। हिन्टन की राय में AI के संभावित खतरे उभर रहे हैं और उनका मानना है कि AI जल्दी ही मनुष्यों से अधिक स्मार्ट हो सकता है।