अगर आप चुनावी रणनीति, अभियान की सोच या राजनीति के पीछे की योजनाओं को समझना चाहते हैं, तो प्राशांत किशोर अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस टैग पेज पर हम उनकी गतिविधियों, रणनीतिक तरीकों और उससे जुड़ी समसामयिक खबरों को सरल भाषा में पेश करते हैं।
प्रशांत किशोर एक राजनीतिक रणनीतिकार और सलाहकार के रूप में जाने जाते हैं। वे वोटर रिसर्च, संदेश निर्माण, डिजिटल कैंपेन और ग्राउंड रिपोर्टिंग को जोड़कर काम करते हैं। उनकी टीमें अक्सर सर्वे, लक्षित कम्युनिकेशन और स्थानीय मुद्दों पर जोर देने जैसी तकनीकें इस्तेमाल करती हैं ताकि चुनावी संदेश प्रभावी बने।
यहाँ हम जटिल शब्दों से बचकर बताने की कोशिश करते हैं कि उनकी रणनीतियाँ कैसे काम करती हैं — किस तरह डेटा से दिशा मिलती है, संदेश किस तरह तय होते हैं और जमीन पर किस तरह कार्य किया जाता है। नये घटनाक्रम और बयान जैसे ही सामने आते हैं, हम साफ और छोटे पैरों पर खबर पहुँचाते हैं।
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नीचे कुछ चीज़ें जो आपको मदद करेंगी: - रणनीति समझने के सरल तरीके: हम बताएँगे कि सर्वे क्या दिखाते हैं और संदेशों का चुनाव किस आधार पर होता है। - ताज़ा बयान और घटनाक्रम: किसी नए एलायंस, अभियान शेड्यूल या स्टेटमेंट की प्रमुख बातें। - आलोचना और बहस: नीतियों और रणनीतियों पर उठने वाले सवालों का संक्षिप्त सार।
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राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तीसरे कार्यकाल में बड़े बदलावों का अनुमान लगाया है। इन बदलावों में पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाना और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर अंकुश लगाना शामिल हो सकता है। किशोर के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों को संसाधन हस्तांतरित करने में देरी कर सकती है और वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन (FRBM) मानदंडों को सख्त कर सकती है।