जब बात आती है भारत के आत्मनिर्भर रक्षा प्रयासों की, तो एक नाम हमेशा ऊपर आता है — तेजस विमान, भारत द्वारा डिज़ाइन और निर्मित हल्का बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान, जो वायु सेना की आधुनिकीकरण की नींव है। ये कोई साधारण विमान नहीं, बल्कि देश की तकनीकी क्षमता का प्रतीक है। इसका विकास डीआरडीओ, भारत का प्रमुख रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन, जो तेजस जैसे प्रोजेक्ट्स को नियंत्रित करता है ने किया, और इसकी पहली उड़ान 2001 में हुई। आज यह विमान भारतीय वायु सेना के बेड़े का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
तेजस को एलएमआरएफ — यानी हल्का बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान — के रूप में डिज़ाइन किया गया था। ये विमान छोटा है, हल्का है, और इसमें ऐसी तकनीकें लगी हैं जो उसे आधुनिक युद्ध के लिए बेहद उपयुक्त बनाती हैं। इसका रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स, और हथियार प्रणाली पूरी तरह से भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा अपग्रेड की गई है। इसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएँगे — ये विमान एक घंटे में 1800 किमी तक उड़ सकता है, और इसे जमीन से लेकर हवा में दोनों तरह के लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। ये सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश है: हम दुनिया के सामने अपनी ताकत दिखा सकते हैं।
इसके अलावा, तेजस के निर्माण में भारतीय वायु सेना ने सीधे हस्तक्षेप किया। उन्होंने इसके डिज़ाइन, टेस्टिंग, और ऑपरेशनल जरूरतों को निर्धारित किया। आज ये विमान देश के कई आधारों पर तैनात है — बरेली, हल्द्वानी, और बालोतरा में। यहाँ तक कि इसका एक नया संस्करण, तेजस MK-1A, भी अब तैयार हो चुका है, जिसमें अधिक लोड क्षमता, नया रडार, और बेहतर ईंधन दक्षता है। ये विमान अब सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए भी एक आकर्षक विकल्प बन रहा है।
इस पेज पर आपको तेजस विमान से जुड़ी विभिन्न खबरें, विश्लेषण, और तकनीकी जानकारियाँ मिलेंगी — चाहे वो इसके नए अपग्रेड हों, या फिर इसकी वायु सेना में भूमिका, या फिर इसके निर्माण में शामिल वैज्ञानिकों की कहानियाँ। ये सब आपको एक ही जगह मिलेगा — बिना किसी फुलावट के, बिना किसी झूठी जानकारी के। बस सच्ची, सटीक, और ताज़ा जानकारी।
दुबई एयर शो 2025 में भारतीय वायु सेना का तेजस विमान एयरोबेटिक मैन्यूवर के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें पायलट विंग कमांडर नमन सियाल की मौत हो गई। यह तेजस के 24 साल के इतिहास में दूसरी दुर्घटना है।